तुझ संग प्रीत लगाईं है ..
दिल ही दिल में
बात चली है
साँसों ने ली अंगड़ाई है
सागर कि लहरों सी तू
शायद मुझ में ही कहीं समाई है
पहनेगी तू कभी
मेरी ही बाँहों का हार
येही मुराद
लेके मन में
तुझ संग प्रीत लगाईं है .............. रवि कवि
बात चली है
साँसों ने ली अंगड़ाई है
सागर कि लहरों सी तू
शायद मुझ में ही कहीं समाई है
पहनेगी तू कभी
मेरी ही बाँहों का हार
येही मुराद
लेके मन में
तुझ संग प्रीत लगाईं है .............. रवि कवि
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