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तुझे छूना चाहता हूँ

मैं तुझे छूना चाहता हूँ तेरा अहसास पाना चाहता हूँ चुमते हुए तेरे ठन्डे माथे को शरारती आँखों के रास्ते दिल की गहराइयों में प्रेम के गोते लगाते हुए तेरे हुस्न की तपिश में जल जाना चाहता हूँ जानना चाहता हूँ समझना चाहता हूँ मैं अपने दिल के अरमान तुझ में बयां कर देना चाहता हूँ तुझे इस तरह पाना चाहता हूँ कि तुझ में समां जाना चाहता हूँ .............. रवि कवि

प्रेम रंग से तर बतर हो गया है

कुछ इतने करीब सिर्फ हम तुम नहीं रिश्ते भी हो गए दोनों जहाँ दो से एक हो गए कोई फासला नहीं दरम्यान अब तेरे मेरे जिन्दगी का एक एक रंग तेरी मेरी साँसों में घुल कर प्रेम रंग से तर बतर हो गया है तू और मैं हम और यह हम नयी नीव की तरफ बढ़ चला है ............ रवि कवि

मंगल मंगल सब रहे सदा

दियें जलाये, उत्सव मनाये दिवाली है आई प्रेम और ख़ुशी के साथ नयी उमंग नयी उर्जा संग है लायी बरसती रहेगी सर्वदा माँ लक्ष्मी की कृपा सन्देश है ये लायी मंगल मंगल सब रहे सदा है आज दिवाली कहने आई ..................... रवि कवि

चाल चरित्र और चेहरे पर सवाल उठाने वालों

चाल चरित्र और चेहरा यक़ीनन पहचान है हमारी नापाक इरादे कुछ भी करले नहीं मिटेगी हरगिज़ हस्ती हमारी हम आसमान से टपके ओले नहीं है बीज है जो जड़ो से उगकर बृक्ष बने है हिंदी है हम, हिन्दू है हम, हिंदुस्तान है हम वसुधैव कुतुम्बुकम की संस्कृति वाली इकलौती पहचान है हम नकली चाल, नकली चरित्र, नकली चेहरों से डरने वाले भी नहीं है हम हम तो इस माटी के कण कण में बिखरी खुशबू है............. दोस्तों जो अपने स्वार्थ के लिए देश के आत्म सम्मान को बेच दे भ्रस्ताचार की ओढ़नी ही जिनका लिबास हो चापलूसी करना ही जिनकी वफादारी का सबूत हो आतंकियों को इज्जत और रास्ट्र प्रेमिओं को तोहमत देना जिनका एकमात्र राजनितिक धरम हो यकीं मानिये.................... ऐसे लोगो से बहुत बेहतर है आप और हम अरे जीने शक हो अपने ही वंशजो के होने पर ऐसे भारत माँ के गद्दार नहीं है कम से कम हम और रही बात हमारी चाल चरित्र और चेहरे पर सवाल उठाने वालों की तो वक़्त बता देगा एक दिन की संस्कृति विहीन, मूल्य विहीन और धरम विहीन होकर महाशक्ति नहीं बना जाता दूसरों के फेंके हुए टुकड़े से स्वाभि मान नहीं स्वाभिमान नहीं जगाया जाता और झोली फैला कर मांग...

तक़दीर की सवारी...........

मौके को बना ले, तक़दीर की सवारी हर हार में छिपी है जीत की खुमारी अरे वक़्त इंतज़ार से नहीं बदलता उठानी पड़ती है हर जिम्मेदारी संभल जाओ आज अभी, यह उम्र का तकाजा है वर्ना जिन्दगी की यह रफ़्तार नहीं है तुमसे सँभालने वाली.............. रवि कवि - "मन का विज्ञानी"

मंदिर और मस्जिद के दीवाने

मेरे मन का भगवान तेरे मन का अल्लाह एक दुसरे से कह रहे है आज कि मंदिर और मस्जिद के दीवाने सिर्फ कर रहे है अपनी अपनी बात मन में करके खड़ी दीवार कैसे बचेगी ये अपनी खुबसूरत कायनात नफरत और द्वेष के आगे सिर्फ और सिर्फ बंटवारा मिलता है श्रद्धा नहीं त्रासदी को बल मिलता है और आज का इंसान इसी को धर्म या मजहब समझता है कैसे समझाए इसे क्या करे ऐसा जिन्दगी का मर्म कतई नहीं है जुदा धर्म और जुदा इंसानियत का होना ......................... रवि कवि
सडको पर बीत रही है जिन्दगी महानगरीय लोगो की चोंकिये मत जनाब मैं बात कर रहा हूँ ट्रेफिक जाम में फसने वाले आम लोगो की दिल्ली की तस्वीर तो बदल गयी दावा है सरकारी इश्तहारो का सचमुच बदल गयी है दिल्ली सही है ये दावे !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! क्योंकि सब कुछ बदल गया है आदमी घर और दफ्तर से ज्यादा सड़क पर समय बिता रहा है महानगर में रहता है शायद इसकी सजा पा रहा है ............... रवि कवि